हाँ मै किसान का बेटा हूँ... दर्द सहता साँस लेता वक्त का पाबंध दिवस निशा एक जिसके बादलो से खुश है वो अंकुर'ण उन आँखों का हाँ मै उस किसान का बेटा हूँ... इक सफ़र सा सफ़र उसका एक अजनबी पगडंडी थक के बैठा हार में हर बात कही उसने अनकही दिल में दिल की ख्वाहिसे फिर भी उसने सिल वो दिल दिया हाँ मै उस किसान का बेटा हूँ... एक ख़राब मौसम इतनी तबाही तखलीफ़ भर ली उसने सीने में फिर भी आनंद लेता बेघर सी जिंदगी जीने में हाँ मै उस किसान का बेटा हूँ... सच से लड़ता मेहनत है करता दूसरो का पेट भरता खुद से भी लड़ता और कहता : जितना बड़ा संघर्ष जीत उतनी ही आनंदमयी होती है हाँ मै उस किसान का बेटा हूँ...