
हाँ मै किसान का बेटा हूँ...
दर्द सहता
साँस लेता
वक्त का पाबंध
दिवस निशा एक जिसके
बादलो से खुश है वो
अंकुर'ण उन आँखों का
हाँ मै उस किसान का बेटा हूँ...
इक सफ़र सा सफ़र उसका
एक अजनबी पगडंडी
थक के बैठा हार में
हर बात कही उसने अनकही
दिल में दिल की ख्वाहिसे
फिर भी उसने सिल वो दिल दिया
हाँ मै उ
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