बिन पानी,
प्यासा नल आज भी वही है,
कितनी जद्दोजहद से
अपना ठिकाना दिया था..
उस बेचारे गरीब ने
वर्ना अमीरो को क्या ?
क्या जरुरत सरकारी नल की...
बड़ी मुश्किलों से
मंगाया फिर लगवाया गया था,
पर बेचारा नल भी गरीब
निकला..
वो तो बेचारा सरकारी लूट के बाद लगा था
जो बचा था उसे उस गरीब ने लूट लिया,
अब दोनों
एक जैसे एक दूसरे को देखते है,
किसी के पास
कभी तो खुशियाँ आयेंगी...?
सरकारे बदलती गयी,
रास्ते हटते गए,
मंजिले बनती गयी,
गरीब की झोपड़ी गयी,
किसी ने ईट बोकर मंजिले बना दी,
पर आज वो नल वही है,
प्यासा
अकेला
गरीब और भूखा...