हमसे क्या पूछते हो, ख़ुद प्यार कर देखो

काग़ज़ की नाव पानी में उतार कर देखो

तैरने वालों को इल्म क्या गहराई का

डूबने वालों के जैसे दरिया पार कर देखो


बाँट दो ख़ुशियाँ या किसी का ग़म ख़रीद लो

ये मुनाफ़े का सौदा है व्यापार कर देखो


मंज़िल का नशा तो कुछ दिनों का है

तमाम उम्र किसी का इंतज़ार कर देखो


वाक़िफ़ है लहू मेरा तुम्हारे हर नशतर से

मैं पूरी तैयारी से आया हूँ तुम वार कर देखो


शौक़ हो अपना कलेजा नापने का गर कभी

जीती हुई बाज़ी किसी के लिए हार कर देखो


उसकी रहमतो पर ऊँगली उठाने से पहले

एक बार तो शिद्दत से पुकार कर देखो


Ruhsafir