सोचता हूं, के कौन हूं मैं..'s image
Zyada Poetry ContestPoetry1 min read

सोचता हूं, के कौन हूं मैं..

Ankur AgrahariAnkur Agrahari August 6, 2022
Share0 Bookmarks 60591 Reads0 Likes

सोचता हूं, के कौन हूं मैं,


लहरों के भीतर एक सहमा समंदर,

या तूफानों को छूती, लेहरों का बवंडर,

उकसाती आंधियों में बहता सा इक झोंका हूं,

या चीखते शोर में पसरा, मौन हूं मैं,

सोचता हूं, के कौन हूं मैं...


बुलबुलों सा जीवन मेरा, 

कब शुरू कब अंत मेरा,

सांसों सा आता जाता जिसम में,&n

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts