महाकाल महादेव महापति,

हे नागेश्वर जगत प्रजापति,

विकट विराट अनादि देवता,

मृत्युंजय महेश गौरिश्वर,

अगम अगोचर नभ के स्वामी,

तुम जगदीश्वर मैं खल कामी,

सकल विश्व के एक नियंता,

अभय दान दो हे भय हंता,

ब्रह्म चराचर मूल तुम्ही हो,

आदि अंत जीवन तुम ही हो,

अणु के नाभि पुष्प तुम्ही हो,

स्वर्ग पृथ्वि पाताल तुम्ही हो,

जीवन की सरिता तुम ही हो,

प्रलय काल का नाश तुम्ही हो,

हे जोगिश्वर हे सन्यासी,

भूत भभूत मसान निवासी,

रावण के प्रिय देव तुम्ही हो,

राम के रामेश्वर तुम ही हो,

अमृत का अमरत्व तुम्ही हो,

विष के मारक तत्व तुम्ही हो,

विज्ञानों का ज्ञान तुम्ही हो,

रजस तमस और सत्व तुम्ही हो,

हे गंगाधर हे कैलाशी,

तुम ही मथुरा तुम ही काशी,

धर्म अर्थ और काम तुम्ही हो,

जीवात्मा का मोक्ष तुम्ही हो,

आदि काल का शून्य तुम्ही हो,

सत्कर्मों का पुन्य तुम्ही हो,

रास रंग और हास्य तुम्ही हो,

हर वाचक का भाष्य तुम्ही हो,

अर्ध चन्द्र तिर्शूल के स्वामी,

ओमकार है जिसकी वाणी,

भांग धतूरा प्रिय तुम्हारे,

विषधर नागों को तुम धारे,

पशुओं के पशुपति तुम ही हो,

प्रकृति के प्रिय पुरुष तुम्ही हो,

हर गणना कि गणित तुम्ही हो,

भोर शाम और रात तुम्ही हो,

ब्रह्मांडो का नाद तुम्ही हो,

ग्रह उपग्रह नक्षत्र तुम्ही हो,

हे अभयंकर हे त्रिपुरारी,

तुम ही नर हो तुम ही नारी,

नृत्य ताल और थाप तुम्ही हो,

विरह प्रेम श्रृंगार तुम्ही हो,

वीनाओं के तार तुम्ही हो,

कलाकार नटराज तुम्ही हो,

जीवन के महावृक्ष तुम्ही हो,

हर चेतन का मूल तुम्ही हो,

हे गंगाधर हे सोमेश्वर ,

शीश जटा, ओढ़े बाघाम्बर,

तुम ही विद्या तुम ही तप हो,

तंत्र मंत्र और पंचामृत हो,

विकट शेष तुम धारण करते,

तुम ही इच्छाओं के तट हो,

जड़ चेतन सब पोषित तुमसे,

श्रीगणेश और अंत तुम्ही से,

अग्नी तीजा नेत्र तुम्हारा,

शीश जटा धारे जल सारा,

प्रलय और निर्माण तुम्ही से,

देवों का देवत्व तुम्ही से,

तुमसे ही अस्तित्व हमारा,

बहे निरंतर जीवन धारा,

हे महेश तुम कण कण रमते,

महायोगी भी तुमको जपते,

सदा रहे आशीष तुम्हारा,

आनंदित हो जीवन सारा,

हे भीमेश्वर हे डमरूधर,

जपूं सदा भोले बम हर हर ......