ना तौल मुझे, मेरी छोटी उड़ान देखकर,
गहरी खाइयों से शुरू हुआ था सफ़र मेरा...
मुकाम की तलाश में यूं मुसाफिर हो गया,
तय करते सफ़र, सफ़र ही मंज़िल हो गया...
सुन लेता हूं लबों को सिए, मशविरे सबके,
जो समझदार हैं , पढ़ लेते हैं ख़ामोशी मेरी...
हजारों शिकायतें मिट जाती खुदा से,
आंखों की जगह, गर आइने दिए होते...
शामिल रहता है ज़िक्र मेरा हर गुफ्तुगू में अक्सर,
उड़ती अफवाहों की दुनिया में काफी मशहूर हूं मैं ...
किसी एक रंग के बस की बात नहीं,
हर रंग ज़रूरी है समा रंगीन करने को...
निकाल देता हूं भड़ास कागज़ों पे अक्सर,
औरों की तरह पलटकर, ये जवाब नहीं देते...
मायूस है खुद से, गमों में घिरा बैठा है,
ले पर्दे हंसी के, सिसकता है हर शख्स यहां...


