मेरे घर का आइना ,
बहुत पसंद है मिज़ाज उसका ,
औरों की तरह सवालात नहीं करता,
हँसता हु तो साथ हँसता है ,
रोता हु तो भी साथ देता है ,
कहीं जाता हूँ तो टोकता नहीं,
मुड़के देखो तो हँसकर विदा करता है...
तुम ये कब करोगे ,
तुम वो कब करोगे,
तुम ऐसे क्यू हो,
तुम वैसे क्यू नही,
तुम अमीर क्यूं नहीं ,
उतना कमाते क्यूं नहीं,
दुनिया जा रही है उस तरफ़,
तुम भी पीछे जाते क्यूँ नही,
इन सवालातो से ऊपर है वो दोस्त मेरा,
मैं हूँ एहसानमंद उसका,
मेरे घर का आइना ,
बहुत पसंद है मिज़ाज उसका ....
