ख़ुशी क्या है,

ग़म का ना होना ?

या ग़म हो भी तो,

उस एक साथ का हमेशा साथ होना ?


ख़ुशी क्या है ,

आँसुओ का ना होना ?

पर जब होती है ये ज़्यादा,

क्यूँ निकलता है ,

आँसुओ का ख़ज़ाना?


ख़ुशी क्या है ,

मंज़िल का मिल जाना?

फिर क्यू होता है मलाल,

ख़त्म होता है जब सफ़र का याराना ?


है कुछ ऐसे ही सवाल जिंदिगी के,

है कुछ ऐसी ही हैरानियाँ ,

कभी मिलता है उजाला जिंदिगी में,

कभी मिलती है परछाइयाँ !!!