कई हज़ार अल्फ़ाज़ों का ,
असर दिखा जाती है,
ये ख़ामोशी की जुबां,
कितने गुल खिला जाती है ,
मोहब्बत का क़ुबूल हो,
या हो नफ़रत का इशारा,
शरारत की हंसी हो,
या ख़याल हो तुम्हारा ,
बिना कुछ कहे भी दिल का ,
हर पैग़ाम दे जाती है,
ये ख़ामोशी की जुबां,
कितने गुल खिला जाती है ....


