घनी धूप में फिरता ,
मैं छावों को ढूँढता,
ठंडे मीठे पानी की ,
एक झील की तलाश में,
गर्म रेत में जलती ,
जूतियों को देखता कभी,
कभी देखता सुलगते ,
सूरज को तिरछी निगाहों से,
इस यक़ीन पे की,
आएगी शाम कुछ ठंडक लिए,
भटक रहा हूँ एक अरसे से,
इस दोपहर में तपता....


