
आज फिर कुछ याद आया ,
एक लम्हा था जो बिता आया ,
कांधों पे टिका था सर उनका,
पूरी रात फिर मैं उठ ना पाया,
आज फिर कुछ याद आया ,
एक लम्हा था जो बिता आया ....
रंग छा जाते थे उनके आने से,
हर महफ़िल हो जाती थी जवां,
आज भी याद है मासूमियत उनकी,
चाहते भी मैं ज
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