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रहमतें


जीवन जैसा मिल रहा है उसे स्वीकार करता हूँ |न गिला, न शिकवा, न शिकायतें हजार करता हूँ |

सुख दुःख तो मन की अवस्थाएँ है |रहमतों पर तेरी सजदे बार बार करता हूँ |

— अंकुर अग्रवाल
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