बहुत बड़ी-बड़ी हाँकता हूँ,स्वयं को छोड़ सभी को आँकता हूँ,धन, दौलत, सम्पदा क्या ख़ाक बाटूंगा,निशुल्क प्रेम तो बांट नही पाता हूँ |
बहुत बड़ी-बड़ी हाँकता हूँ,स्वयं को छोड़ सभी को आँकता हूँ,
धन, दौलत, सम्पदा क्या ख़ाक बाटूंगा,निशुल्क प्रेम तो बांट नही पाता हूँ |