मेरे अंतर में यूँ जागो कि तुम्हारा दीद हो जाये |
मुझसे मुझे मिलादो और मेरी ईद हो जाये |
चाँद सी ठंडक हो मुझमें |
गले मिलूँ तो आत्मीयता हो |
सेवईयों सी मीठी हो वाणी |
व्यक्तित्व मेरा जाफ़रान हो जाये |
मेरे अंतर में यूँ जागो कि तुम्हारा दीद हो जाये |
मुझसे मुझे मिलादो और मेरी ईद हो जाये |
ख़ालिस करदो तो रोज़ों का सवाब पाऊँ |
तुम्हारा बन प्रेम की ईदी लुटाऊँ |
बस अब मैं मैं नहीं, तू ही तू हो जाये |
मेरे अंतर में यूँ जागो कि तुम्हारा दीद हो जाये |
मुझसे मुझे मिलादो और मेरी ईद हो जाये |
by Ankur Aggarwal


