ए मन थोड़ा तो सब्र कर |

संभल संभल पग धर |


उड़ान तेरी आकाश सी ऊंची है |

चांद तारों को पाने की भी ख्वाहिश है |

अंकुश नहीं है तुझ पर कोई |

न जाने कैसी जोर अजमाइश है |

न भटका, वास्तविकता अपना, वापिस अपने घर में आ |


ए मन थोड़ा तो सब्र कर |

संभल संभल पग धर |


मुझे ही मुझसे दूर न कर |

व्यक्तित्व मेरा चूर चूर न कर |

मस्तिष्क ऐसे कमजोर न कर |

अंतर में यूँ शोर न कर |

सकारात्मक सोच बना, हृदय हर्षा, काबू में आ और विजय दिला |


ए मन थोड़ा तो सब्र कर |

संभल संभल पग धर |


by Ankur Aggarwal