क्या लिखूं
कि वो सबमें एक सा है |
जो कुछ दिखता है वही है |
नहीं भी जो दिखता वो भी वही है |
जो चेतना का एक मात्र स्रोत है |
अचेतन भी वही है |
क्या लिखूं
कि वो सबमें एक सा है |
माँ के गर्भ में बनने वाले हर शिशु का निर्माण कर्ता है |
संसार में फैले अज्ञान, अहंकार, अंधकार का हर्ता है |
वो जो पाचों तत्व, उत्क्रातिं पथ, मनुष्यत्व है |
या फिर दया, करुणा, क्षमा और ममत्व है |
क्या लिखूं
कि वो सबमें एक सा है |
~ अंकुर अग्रवाल


