अनश्वर जलाने से जला नही करता |

धर्म अन्दर हो तो मिटा नही करता |

क्यों मारते हो इन्सानियत को यूँ रोज |

खुदा ऐसे किसी को मिला नहींं करता |


~ अंकुर अग्रवाल