रंग तो तेरे दिन रात बरसते हैं |
रंगा जो तुझमें तो हर दिन होली |
तुझसे महरूम हर रंग को तरसते हैं |
जबसे रोशन हुआ तेरे रंग से, हर रंग निराला लगता है |
कभी धूप, कभी छांव, कभी उजाला ही उजाला लगता है |
इन्द्रधनुषि रंगों सा जीवन, नित नये एहसास बुनते हैं |
रंग तो तेरे दिन रात बरसते हैं |
रंगा जो तुझमें तो हर दिन होली |
तुझसे महरूम हर रंग को तरसते हैं |
बुराइयों से डर है मुझे, पर तुम में पूरा विशवास बसता है |
भले ही बैठना हो अग्नि पर, ठंडक का उसमें आभास बसता है |
सब में जागृत कर अपनी ही शक्ति, श्री कृष्ण स्वयं ही रास रचते हैं |
रंग तो तेरे दिन रात बरसते हैं |
रंगा जो तुझमें तो हर दिन होली |
तुझसे महरूम हर रंग को तरसते हैं |
~ अंकुर अग्रवाल


