तुम्हें देख देख मुस्कुराऊँ |
दिल करता है फिर से बच्चा बन जाऊँ |
अबोधिता और भोलापन हो |
जिसे देख हर हृदय प्रसन्न हो |
हर चीज को मैं खेल बनाऊँ |
दिल करता है फिर से बच्चा बन जाऊँ |
आश्रय और समर्पण हो |
दिव्यता के नित दर्शन हों |
छोटा होकर भी बड़ा पद पाऊँ |
दिल करता है फिर से बच्चा बन जाऊँ |
ना बोध हो बुद्धि और भावनाओं का |
ना कुछ खोने का, ना पाने का |
कभी हंसते हंसते रोऊँ और |
कभी रोते रोते ही सो जाऊँ |
दिल करता है फिर से बच्चा बन जाऊँ |
by Ankur Aggarwal


