कोई नहीं समझ सकता उनका दुख, 

जिन्होंने खो दिया अपनों को |

सुना है वक्त ही दवा है हर गम की, 

पर वक्त बीतेगा कैसे भरने में इन जख्मों को |


दुख, शोक, संताप और वियोग है |

जीवन न जाने कैसे कैसे प्रयोग है |

संग देखे थे जो ख्वाब रह गए अधुरे |

जाने किस की नजर लग गई मेरे सपनों को |


कोई नहीं समझ सकता उनका दुख, 

जिन्होंने खो दिया अपनों को |


धीरज तो रखना होगा, 

मन को भी समझाना होगा |

देकर हौसला सभी को,

जीवन नया बनाना होगा |

ले प्रण, करेगा रण,

पूरा करने अधुरे सपनों को |


कोई नहीं समझ सकता उनका दुख, 

जिन्होंने खो दिया अपनों को |


~ अंकुर अग्रवाल