सरहदों के प्रहरी..... अटल हिमालय के सीस पर, तिरंगे का ताज सजाया. फिर उसी माथे के तिलक के खातिर, अपना लाल लहू बहाया.
हे भारत माता, तेरे कदमो में, जिन्होंने अपना सीस नवाया. हा वो दीवाने है , तेरी आज़ादी की मोहब्बत में बेखौफ, वो सच्चे आशिक मस्ताने है .. तेरे ही दामन के वो फूल, तेरी आज़ादी के सच्चे दीवाने है ...