की पिया जी....
जब से गए परदेश पिया तुम,
छोड़ के पीछे मोहे,
सारि उमरिया रो रो बिता दी,
सुध बुध पूछे न कोई........
की साजन साजन मैं करू
साजन मिलिया ना कोई,
नैना बिछाए गली मोहल्ले
कब जागे कब सोये.........
बीत गयी मोरी सारि उमरिया
की साजन जी
बीत गयी मोरी सारि उमरिया,
खत भी आया ना कोई
भीगे नैना राहे देखे,
कब जागे कब सोये.........
लिखती खत मैं रोज पिया जी.
लिख लिख कलमिया भी रोये,
तुझ बिन मेरा जीवन सुना,
की सुघ बुध पूछे ना कोई.......
जब से गए परदेश पिया तुम,
छोड़ के पीछे मोहे,
सारि उमरिया रो रो बिता दी,
सुध बुध पूछे न कोई.