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खफ़ा-ए-इश्क़


हम जो उन से वफ़ा का है उम्मीदरूख़-ए-ख़्वाब में बेवफ़ा है दीद

इनायत-ए-दुआ से वो है खफ़ा,जो नहीं जानते वफ़ा क्या है।

— अंकित
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