जब साथ हो,
इस कदर हो की सब भूल जाए। 
वो गुस्ताख़ी, वो नादानी, वो बेचैनी
मिलने की खुशी कही बीत जाए।

महफूज़ हूं, तुम साथ हो जब
तेरे साथ हूं मैं जुदा से ही डर,
सोच कर भी न सोचा,
दूरियां कोसो मिल है अब।

जब साथ हो,
इस कदर हो की सब भूल जाए।

     ~अंकित