मृदुल मनोहर मोहक मेंह सी
इस जीवन में तुम आए।
कठिन कटीली कटु डगर पर
बादल बन कर तुम छाए।।
सन्नाटे में सोए स्वप्न की
साकार हकीकत बन कर के।
संघर्ष में साथ निभाने को
साथी बनकर तुम आये।।
जीवन की जटिल परीक्षा में
सह उपदेशक बन करके।
मंझधार से नाव बचाने को
मांझी बनकर तुम आये।।
संशय में संलिप्त ध्येय के
साकार सहायक बन करके।
उधड़े धागों को फिर बुनने
शिल्पी बनकर तुम आये।।
अधरों की अमिट मुस्कानों का
श्रृंगार सहयोगी बनकर के।
आशाओं के दीपक लेकर
कुम्हार बनकर तुम आये।।
भ्रम में डूबे भ्रमित कर्म का
प्रज्वलित आईना दिखलाने।
हाथ पकड़कर लक्ष्य मार्ग
पर मुझे चलाने तुम आये
