आगाज था मुझे कातिल है वो मेरा भी कत्ल करेगी

फकत इतना तो बता दो इस दिल का क्या करूं


बड़ा गुरूर है उसे अपनी अदा पर मेरा हश्र भी चकनाचूर करेगी

फकत इतना तो बता दो इस अदा का क्या करूं


इल्म था बड़ी तहजीब से मेरे इश्क की सल्तनत हथिया कर ताज नीलाम करेगी

फकत इतना तो बता दो इस इश्क का क्या करूं


जानता था बेमुरव्वत होकर ठुकराएगी मेरी आरजूओं का शगूफा

फकत इतना तो बताओ उसकी क़ातिलनिगाहों का क्या करूं


खबर थी कि दिल की मयस्सर डोर का एक-एक मोती बिखेर देंगे वो

फकत इतना तो बता दो इस डोर का क्या करूं


ज़हन में था कि मेरे ख्वाबों के हुजूम को कब्रिस्तान बना देंगे वो

फकत इतना तो बता दो इस ख्वाब का क्या करूं


तकाजा था मुझे कि उनके हाथों में भी एक चाशनी भरा खंजर है

फक़ इतना तो बता दो इस चाशनी का क्या करुँ


हर लम्हा सोचता हूं कि अगले पल उसे मोहब्बत नहीं करूंगा

फकत इतना तो बता दो जिंदगी भर की मोहब्बत का क्या करूं।