एक मुद्दत के बाद वो आज नज़र आये
मेरी उनसे कुछ गुफ्तगू हुई काश ये खबर आये
इन्तज़ार में उनके हम सारी रात बिछाये बैठे रहे
वो सीने से लग गये काश ये खबर आये
एक मुद्दत के बाद वो............
क़फस में क़ैद यादों के मैं देखता रहा टुकुर-टुकुर
इस क़ैदी उन्होने भी उसी हसरत से देखा काश ये खबर आये।
एक मुद्दत के बाद वो.............
उनकी मुस्कान के दो नगीने चुरा लिये मैने चुपके से
उन्होंने भी हमसे कुछ चुराया हमसे काश ये खबर आये
एक मुद्दत के बाद वो.....
उनकी तारीफ़ के दो बोल भी अपनी यादों मे सज़ा लिये
वो भी कुछ सजा ले गये अपनी याद में काश ये खबर आये
एक मुद्दत के बाद वो.....
खुश हूँ कि जाते हुए अलविदा नहीं बोला उन्होने
वो लौट आये फिर से काश ये खबर आये
एक मुद्दत के बाद वो .........


