मधुर मिलन की ये रैना,
यूँ कोरी खाली ना जाने दो।
भर लो बाहों में मुझको तुम,
और सूनी रात सजाने दो।।
पलकों के झरोखे झुके हुए,
और हया के पर्दे पड़े हुए।
देकर हाँथों में हाथ मुझे,
घूँघट दीवार हटाने दो।।
लो हाथ मेरा अपने हाथों में,
मोती बन सागर में खो जाओ।
बन जाऊँ मैं जोगी तेरा,
ये यौवन धार नहाने दो।।
काजल से भरे ये नैन मधुर,
और मोहक इत्र इस मेहंदी की।
गहरे लाल गुलाबों से,
ये सूना कण्ठ सजाने दो।।
ये लाली इन गोरे गालों की,
और आंखों में समुंदर उफनाता।
छूकर बेजान हृदय को तुम,
धड़कन को धड़काने दो।।
मन्द पवन कह रही कान में,
ज़ुल्फों के सुमन सहलाने दो।
ये दूरी अब घातक होगी,
अधरों से अधर टकराने दो।।
तिल-तिल बढ़ती ये तड़प प्रेम की,
और भावों की सुनामी उमड़ रही।
लग जाओ गले देकर के इज़ाज़त,
मुझे प्रेम भँवर बह जाने दो।।
