हमारी प्रकृति's image

पावन हरित धरा को अब,

दूषित नहीं करो हे नर।

कितने सुन्दर हैं देखो ये,

झीलें नदियां और सरोवर।

मनुहर और रमणीक दृश्य,

ये प्रकृति दिखाती प्रति बेला।

मन्द पवन कहीं तेज़ हवायें,

संगम कैसा अलबेला।

हरित धरा है पाँव के नीचे,

ऊपर अतरंगी आकाश।

पंछी,पौधे,पेड़ पुष्प, 

सब करते हैं इसमे निवास।

झम- झम बारिश वर्ष मे आकर,

सबको जीवन देती है।

ये प्रकृति मात है बड़ी दयालू,

बदले कुछ न लेती है।

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