चुप क्यों हो,क़सम है तुम्हें

कुछ बोलो तो सही।

दिल का राज ही तो है,

कोई जहन्नुम का दरवाजा थोड़ी है,

एक बार इसे खोलो तो सही।


चुप क्यों हो......


साथ हमें चलना है उम्र भर,

मत सोचो जमाना क्या कहेगा।

दरख्वास्त है खुद में एक बार,

मुझको तोलो तो सही,


चुप क्यों हो.....


जीवन है तो मुश्किलें भी होंगी,

मिल कर सुलझायेंगे ये पहेलियाँ।

एतमाद है अगर तुम्हें मुझ पर,

तो संग मेरे एक बार चलो तो सही।


चुप क्यों हो.....


हर ख्वाहिश मेरी बस तुम तक ही तो आती है,

और तुम हो कि मुझ में एक बेज़ुबाँ कैदी बन बैठे हो।

सारे दर्द धुआं हो जाएंगे ये वादा है,

एक बार गले लग कर रो लो तो सही।


चुप क्यों हो......


एक मुद्दत बीत गई इन आंखों को नींद देखे हुए,

बस ज़िंदगानी बश़र कर रहे हो।

एक नई सुबह तुम्हारे इंतज़ार में है,

एक बार नींद भर के सो लो तो सही।


चुप क्यों हो.....


तुम मुझमें हो मैं तुममें हूँ,

यह चर्चा तो पूरा श़हर जानता है।

मैं संग चलूंगा तुम्हारे जन्नत तक,

एक बार मेरे संग जिंदगी जी लो तो सही।


चुप क्यों हो क़सम है तुम्हें

कुछ बोलो तो सही।