लड़ती है तुमसे झगडती है तुमसे

कभी हरा देती है तो कभी हार जाती है तुमसे

रोज एक हसीन उम्मीद देती है तुमको नई शरुआत की

तो कभी ज्यादा मेहरबाँ होकर सब आसान कर देती है

बताती है तुमको नज़रिया अपना हर नज़रिये से

सीखाती है हर पहलू अपना एक नये ढंग से

और बनाती तुम्हारी एक अलग पहचान है

पर ना जाने लोग क्यों कहते हैं कि 

जिंदगी कितनी आम है!!