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कल का क्या पता

गर आज एक दीया बुझ जायेगा, 

कल का क्या पता, कल कौन सा पड़ाव आयेगा।। 


हिम्मत जो हमने खो दी है आज, 

क्या सूरज कल फिर वही सुबह ला पायेगा।। 


झरोखों से मत देखो तुम मेरी हार का तमाशा, 

कल क्या पता, मेरी जीत का इस्तिहार अखबार मे आयेगा।। 


जो समय गया-गवाया अब तक, 

शायद कल कुछ नया वो पैगाम दे जायेगा।। 

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