चलो फिर से एक अजनबी सी मुलाकात करते हैं।
एक मेज दो चाय और वही बातें तमाम करते हैं।।
आज फिर से उन बिखरे पुराने पन्नों पर हम।
एक नयी कहानी का खूबसूरत सा आगाज़ करते हैं।।
वो यादे वो मुलाकातें वो सफर की बातें फिर से जीते हैं।
अगर कहीं कुछ अनबन की बातें भी रही थी दरमियाँ,
तो आज उन बातों को भी थोड़ा आजाद करते हैं।।
बेशक मोहब्बत तो दोनों को है तो क्यूँ ना,
थोड़ा सा साथ तुम दो और थोड़ी शुरुआत हम करते हैं।।
चलो फिर से एक अजनबी सी मुलाकात करते हैं,
एक मेज दो चाय और वही बातें तमाम करते हैं।।


