एक मुलाक़ात ऐसी हुई, वो रात बदल के चली गयी

उस रात बात कुछ ऐसी हुई, हालात बदल के चली गयी

उस रात में नशा था कोई, बस वो दिल को मेरे भा गया

उस रात ना था इरादा कोई, वो आया और दिल में समा गया

वो हाथ थाम के चला था जब, राहें जन्नत में बदल गयी

वो नज़र में इश्क़ लेके खड़ा था, मेरी नज़र उससे बस अटक गयी

मेरे हाथ में एक पेन था, वो अल्फ़ाज़ ए इश्क़ में लिख गयी

वो परवानगी ग़र ले आता, मैं जुनूँ सी इबादत में तर गयी

वो रिवायत में उलझा हुआ तर्ज़ कहा, मैं महरूम सी अर्श में बह गयी

नूर नैनों से छलका जो उसकी , सब्र मेरी भी सहम गयी

उसे आशियाना बनाने का बोल के, मैं रेत सी उसमें फिसल गयी

विरह ही इश्क़ का अंजाम है, उसका पैग़ाम समझ में चली गयी

वो भी चला गया ये कहते हुए, वो मुलाक़ात अब बस याद रही

वो याद रही, वो बात सही, अल्फ़ाज़ सही, मुलाक़ात सही

इस क़िस्से को मुक्कम्मल करने के हालात अब मेरे पास नहीं

आँखो ने उसकी कहानी ये कही और बरसात गरज के बरस गयी

एक मुलाक़ात ऐसी हुई, जो रात बदल के चली गयी

उस रात बात कुछ ऐसी हुई, जो हालात बदल के चली गयी