तेरे उन झूठे खतों के साथ जल रही है रूह मेरी,गर है इश्क तो बुझा दो मेरी चिता की आग को !और ना जाने कब निकल जाए जिस्म से जान मेरी,वरना उड़ा दो अपने बेवफाई की आंधी में मेरी राख को !!
तेरे उन झूठे खतों के साथ जल रही है रूह मेरी,गर है इश्क तो बुझा दो मेरी चिता की आग को !
और ना जाने कब निकल जाए जिस्म से जान मेरी,वरना उड़ा दो अपने बेवफाई की आंधी में मेरी राख को !!