उधार है तुम पर मेरा एक तरफा इश्क़

 कहीं मुझे ही कर्जदार ना बना देना 


मिलता हूं मैं हर रात तुमसे ख्यालों में 

कहीं आज हिज्र की रात ना बना देना


मैं रखता हूं जज्बात अपने तेरे सामने

 तुम कोई खिलौना ना बना देना


और मिला रहा हूं रुह अपनी तुमसे कहीं 

रकिब से इसकी मुलाकात न करा देना 


कत्ल कर रहा हूं तुमसे मिलने की सारी 

ख्वाहिशें कभी गुनहगार ना बना देना 


 सब कुछ जान कर भी हूँ खामोश

 हूँ कहीं मुझे मुर्दा ही ना बता देना