शहर का शहर इस बेतरतीब इश्क में डुबा है,,एक ना समझ सा परिंदा रातों को काट मंजिल को पाने चला है,,,यहां हर कोई टूटे दिलो की दास्तान गाने में डूबा है,,वो जाग के रातों में किताबो से अपने मुकाम को पाने चला है,,
शहर का शहर इस बेतरतीब इश्क में डुबा है,,
एक ना समझ सा परिंदा रातों को काट मंजिल को पाने चला है,,,
यहां हर कोई टूटे दिलो की दास्तान गाने में डूबा है,,
वो जाग के रातों में किताबो से अपने मुकाम को पाने चला है,,