तुम्हें सुनाने को में इश्क़ बार बार पढ़ा पर तुमने सुनना ना था,

जो था तेरी रूह में शामिल वो अब जिन्दा बचा ना था,,

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कभी था जिन किस्सों में शामिल उन में अाज मेरा जिक्र ना था,

में अपने इश्क़ कि किताब लिखता पर इस फरेब के बाजार में खरीदार कोई ना था !!


~अंकित''अ:निरुद''