ऋण माफ़ी एक छल....


इस समय की शापित,

महँगाई से लड़ लड़।

पेट की जलती अग्नि दबा कर।

कुछ पूंजी बचाई थी मैने।।


मिलो तक पैदल चला,

साथ में बस गुड़ चना।।

एक वृक्ष का एहसान रहा,

छाया का ना दाम लिया,

कुछ देर गुजारी थी मैने।।


व्यापारी से मुलाकात हुई।

विश्वास पर आघात हुई।।

दाम बताये ओने पौने।

पर बीज ले लिया था मैंने।

हाँ फसल उगानी थी मैने।।

हाँ फसल उगानी थी मैने।।


सूरज के किरोध की, 

उस आग बबूला गर्मी में।

धरती की पथरीली छाती चिर के,

कुछ बीज डाला था मैने।

हाँ फसल उगानी थी मैने।।


बिन मौसम बरसात से।

कीड़ो के घात से।।

जानवरो की मार से।

हाँ फसल बचानी थी मैने।।



पूरी साल ना गया कही।

फसल संग पड़ा रहा वही।

लहू जमाती सर्दी में।

कोर लगानी थी मैने।

हाँ फसल उगानी थी मैने।।



नागों में ना दम रहा।

तालाब का पानी जम रहा।

ऐसी सर्दी की मार में।

मैं खेत में गन्ना तोड़ रहा।

सब सुख से दुरी बनाली मैने ।।


अब में भी वर्द्ध हो आया।

खेतो में आजीवन कमाया ।

पर खाते में ना धन पाया।।

बेटी भी शादी योग्य हुई।

बेटा बेरोजगार कहलाता है।

चिंता चर्म पर आ पहुची।

मन मेरा घबराता है।।

मन मेरा घबराता है।।


रातो को नींद ना आती है,

क्या क्या चिंता नही सताती है।

साथी बन बैठा प्याला अब,

क्या रखा है बिन हाला अब।।

क्या रखा है बिन हाला अब।।


घनघोर अँधेरा बढ़ आया,

थोड़ा नशा भी चढ़ आया।

मै जैसे ही लेटा, मुझे ऐसा लगा,

जैसे शीने पर मेरे, था कोई खड़ा।

रूप मेरे जैसा था उसका,

आँखे लाल अंगार थी।

भागना तो चाहा मैने,

पर कोशिश बेकार थी।

पर कोशिश बेकार थी।


वो मुझ पर खड़ा, मुझे देख रहा।

मै समझा यमराज, स्वम आये है।

ऐसा लगा, वर्षो से था इंतजार,

और आज खुले मृत्यु के दुआर।

हाँ आज खुलेंगे मृत्यु के दुआर।

मै इस खुशी में मुश्कुरा बैठा।



देख मुझे वो रूप मेरा, 

और भी विकराल हुआ।

जैसे तांडव करके जायेगा।

आज मेरा काल बन जायेगा।


फिर बोला चिल्ला कर वो,

क्यू तू मरना चाहता है।

हिम्मत कर और सबको बता,

भाग्य तेरा कौन खता है।

हिम्मत कर और सबको बता,

भाग्य तेरा है कौन खता।


एक चोर लुटेरा कपटी, 

जब वोट मांगने आता है,

तूझ जैसो की वोटो से,

वो चोर नेता बन जाता है।

जिसकी दादी दिए को रोई,

फिर वो गाड़ी बड़ी चलता है।

तू बेरोजगार का पिता कहलाता है।


राजकोष के राजा बनके,

राज्य को वो लूट रहे।

तेरे पैसे से, ऋण दे तेरा,

वो क्यू शाबाशी लूट रहे।

तुम तो ठहरे बुड़बक,

चोर को बैठा कर तिजोरी पर,

खुद ऋण माफ़ी को घूम रहे।

खुद ऋण माफ़ी को घूम रहे।

ऋण माफ़ी वो उड़ता तीर है,

बेटा जो फिर तेरे बढ़ना है।



तेरा बेटा रोजगार पर होता,

तो क्यू ऋण लेने जाता तू।

वोट के बदले रोजगार मांगता,

तो फिर ना मजबूर कहलाता तू।

तो फिर ना मजबूर कहलाता तू।


कितने वर्ष है बीत चुके और,

कितने वर्ष और जाएंगे।

जब तक काम को वोट ना दोगे,

चन्दे (ऋण माफ़ी) पर ही जीवन बिताओगे।

मै कोई यमराज नहीं हूं।

मै आत्मा हु तेरी।

तुझे समझाने आयी हु,

मृत्यु से बचाने आयी हु।