मनोबल.......
हा मैं आज हार गया। आज से।
आज तो कल फिर आएगा।
कल फिर मिलूंगा आज से।
कल फिर लड़ूंगा आज से।
हा मैं आज हार गया। आज से।
अंधकार फिर से छा गया।
पूर्ण प्रकाश को खा गया।
कल सूर्य फिर आएगा।
यूद्ध कर अंधकार को हराएगा।
हा मैं आज हार गया। आज से।
अब फिर अभ्यास करूँगा।
प्रबल प्रयास करूंगा।
मै हार नहीं मानूँगा आज से।
ना भूत मेरा ना भविष्य मेरा।
आज से रोज लड़ाई है।
हर एक कदम का युद्ध है ये।
जीवन पथ पर बहुत कठनाई है।
जब तक काल नहीं आता।
देह मेरी को नहीं खाता।
मै हार नहीं मानूँगा आज से।
जब घोर विपदा आती है।
विनाश को साथ लाती है।
वीर भी पीछे हट जाते हैं।
साथ नहीं दे पाते है।
नहीं चाहिए साथ किसी का।
नहीं पकड़ना हाथ किसी का।
हैं मुझे पता तुम कर्ण नहीं हो।
हाँ मुझे पता तुम कर्ण नहीं हो।
मै हार नहीं मानूँगा आज से।
संघर्ष की चादर ओढ़ लूंगा।
हर सुख से नाता तोड़ लूंगा।
ये तो बस काली बदली है।
घन घोर अंधकार नहीं है।
हार मुझे सुविकार नहीं है।
मै हार नहीं मानूँगा आज से।
पतझड़ के हो जाने से।
पत्तो के गिर जाने से।
विर्छ नहीं मुखः मोड़ते है।
नहीं पत्तो से नाता तोड़ते है।
मै मनुज मैं बलशाली हु।
क्या हुआ जो हाथ खाली हु।
मैं हुंकार भरूँगा फिर दहाड़ करूँगा।
हर बाधा को चीरकर पार करूँगा।
मैं हार नहीं मानूँगा आज से।
राहा मेरी जब मुझे बनानी, तो तुम कौन हो।
हर विपदा जब मुझे उठानी, तो तुम कौन हो।
मेरी मंजिले मुझे है पानि, तो तुम कौन हो।
मुझे ही लिखनी मेरी कहानी, तो तुम कौन हो।
वचन निष्ठा से खाऊंगा, प्राणो पर खेल जाऊंगा।
मैं हार नहीं मानूँगा आज से।
आज तो कल फिर आएगा।
कल फिर मिलूंगा आज से।
कल फिर लड़ूंगा आज से।
मैं हार नहीं मानूँगा आज से।
# अंकित लंदन तोड़
