गीले बाल और झुमके के संग तुम्हारी यादें
जब सूरज की किरण तुम्हारे सुर्ख बालो पे पड़ती है,
तो उस रौशनी से तुम्हारे काले घने बाल चमकने लगते हैं, कानों में लटके तुम्हारे झुमके भी तुम्हारे गालों से टकरा कर इतराने लगते हैं,
तुम जब काजल लगाती तो,
चाँद की चांदनी सी लगती हो,
फिर चांद भी तुम्हे देख शरमाने लग जाता हैं,
जब तुम अपने पलकों को बार-बार झुकाती हो,
मानो भरी दोपहरी में सांझ को बुलाती हो ,
दिलों में लाखों किस्से दफन करके,
बस दिनभर मुस्कुराती ,
गुमसुम सी लड़की चुप रहती,
घिरे मेघ सी तुम्हारी वो प्यासी आंखों में मानो बारिश समाने लगी ,
वो इन्द्र धनुष से भी सुन्दर तुम्हारी मासूम सी मुस्कान,
जो अनेक रंग लिए पूरे फिजाओं में बिखर जाती हैं,
तुम जैसी भी हो बस कायनात हो
