जिन बातों पर मैं हँसा था उस वक़्त
उन बातों पर रोने को जी करता है,
दूरियों का एहसास जितना हो रहा
उतना नजदीक जाने को जी करता है।
- अंकित कन्नौजिया


जिन बातों पर मैं हँसा था उस वक़्त
उन बातों पर रोने को जी करता है,
दूरियों का एहसास जितना हो रहा
उतना नजदीक जाने को जी करता है।
- अंकित कन्नौजिया