उठे जब दर्द के आह तब हमभी सहम गए
बारिश की बूंदे ऐसे पड़ी कि हम जम गए,
जिन यादों में मैं जला हूँ और जो जल रहा हूँ
सच बताऊ तो जीने से ज्यादा हम मर गए।
- अंकित कन्नौजिया


उठे जब दर्द के आह तब हमभी सहम गए
बारिश की बूंदे ऐसे पड़ी कि हम जम गए,
जिन यादों में मैं जला हूँ और जो जल रहा हूँ
सच बताऊ तो जीने से ज्यादा हम मर गए।
- अंकित कन्नौजिया