हम जानते हैं सबने तुमको रुलाया है

मगर फिर भी तुमने कहा किसी को भुलाया है,


लगा है तोहमत अब तक बहुत तुम पर

बावजूद इसके ख़्वाब तुमने सजाया है,


हैं कुछ दर्द जो याद आते हैं घड़ी दो घड़ी

जिंदगी जैसे किसी और का बकाया है,


होगा वो भी किसी दिन मुरीद तुम्हारा

अभी वो लोगों की बातों में आया है।

          - अंकित कन्नौजिया