ढूंढ तो मैं भी रहा हूँ

बेहतर शख्स

और शायद तुम भी

तुम बेहतर नही हो?

तुम मिल जाओ हमें

हम बेहतर लगे 

तो आजमा लो हमें

आखिर ये जिद्द कबतक चलेगी

ये अकेले सब ढूढेंगे 

तो कोई मिलेगा क्या?..इस जहां में।

               - अंकित कन्नौजिया