शक्ति है सहनशक्ति है
कई रूपों की अभिव्यक्ति है
माँ बेटी और पत्नी का रूप है
त्याग समर्पण का स्वरूप है
नारी है वो फूल सी क्यारी है
काली का रूप सब पे भारी है
वो अंगनी भी है वो संगनी भी है
मोह रंगनी भी है मोह भंगनी भी है
मान है समाज में सम्मान है
पोरुश जीवन का अभिमान है
नारी ऊँचाइयों का आधार है
कल्पना चावला सी धार है
नारी निर्मोही है निराकार है
नारी बिन जीवन धिक्कार है


