उम्र बदलती रही पर वो एक ख़्वाब ना बदला,
किराये की साँसे ओर किराये का मकान ना बदला,
गुज़र गया बचपन ओर अब ये जवानी भी,
कल जो था एक सवाल वो सवाल ना बदला,
किराये की ही सही एक छत का तो है साया,
माँ के आँसू ओर इस दिल का .मलाल ना बदला,
रात की थकान अब सुबह रोक नही पाती मुझको,
लड़ता हूँ खुदसे ओर खुदा से मगर वो साल ना बदला,
बस इस उम्मीद में आज भी हूँ किरायेदार मै,
एक ख्वाब है खुदका आसरा, वो ख्वाब ना बदला..! by ankhe bolti hai