कभी गोद में तो कभी कंधे पर,
उस पिताह ने अपने बच्चे को घुमाया होगा,
कभी डॉक्टर तो कभी वक़ील बनाने का,
सपना सजाया होगा,
उस मासूम की मासूमियत को,
कई बार केमरे में छिपाया होगा,
दिन रात मेहनत कर उस पिताह ने,
इतना पैसा कमाया होगा,
अपने बच्चे के अड्मिशन के लिए,
जाने कितने स्कूलों में फ़ोरम लगाया होगा,
पर क्या पता था उसको कि,
रयान बन आएगा काल,
भविष्य का मंदिर ही बनेगा,
उसकी मौत का जंजाल,
महज़ बीस मिनट का,
तो वक़्त हुआ था,
अगले ही पल उसके हाथ में,
उसके बेटे का लहू था,
लहू से लतपथ अपने बेटे को,
जब उसके माँ-बाप ने उठाया होगा,
धरती फट गई होगी,
आस्माँ ने भी शोक जताया होगा,
बस पल भर का ही तो पल बदला है,
ख़ुशनुमा मंज़र शोक ओर सांतवना में बदला है,
कोई ड्राइवर तो कोई स्कूल पर,
इल्ज़ाम लगा रहा है,
पर सच कुछ ओर ही,
अपने जाल बना रहा है,
कोई तो है जो मंदिर में रह कर,
अपने पाप कमा रहा है,
वो ड्राइवर भी तो,
किसी का पिताह रहा होगा,
इतनी हेवानियत से फिर कैसे,
उसने बच्चे का गला रेंदा होगा,
इन सब के बीच बस एक सच मिला है,
वो घर,
जहाँ उस बच्चे की किलकारियाँ गूँजती थी,
आज सूना पड़ा है..!
by Yogesh Rathor ( @ankheboltihai )