तुम आ रहे हो आ भी जाओ दिन ढल रहा है पल-पल तुम्हारा इंतज़ार बहुत खल रहा है।   चाँद भी बेसब्र हो बादलों के पीछे छिपा है, तुम्हारा घूँघट उठाने को दिल मचल रहा है।   बोल के तो गईं थी की ना आओगी कभी, फ़ीर ख़्वाब में आना जाना क्यूँ चल रहा है।   शोर देखो कितना कर रहा दिल धड़क के, गले लगा लो मोम सा यश पिघल रहा है   ज़मानत पे छूटे हैं आज हम अपने दिल से, पर खवाइशों में यहाँ पूरा शहर जल रहा है   दोष इसमें तुम्हारा कुछ भी नहीं है मेरी जान सुने देश में चुनाव का जलसा निकल रहा है   पिछली बार कोई कमी छूट गई थी शायद, इसलिए लूटने का नया प्लान बन रहा है।