गली तेरी आज फिर से सुनसान खड़ी है, झूटे वादों को समेटे आज वीरान खड़ी है, बेवफ़ाई नाम लूँ तो तौबा कर लेंगी साँसे, फिर उसके इश्क़ में हुई बदनाम खड़ी है, किस क़द्र कह दूँ है ये भरोसे की दुनियाँ, आइने के टुकड़ों में भी अनजान खड़ी है, ज़िंदगी बिखर रही है रिश्ते सम्भालते-2, अब साँसे भी खुद्क़ी बनी मेहमां खड़ी है, ख़ुदगर्ज़ हुआ यश तो रिश्ते कोन संभाले, चहरे पर लिए मासूमियत नादान खड़ी है, आज छोड़ के बाग़-ए-फ़रिश्तों का सारा, इंसानियत ज़िन्दों के क़ब्रिस्तान खड़ी है। Like Ankhe Bolti Hai